श्री विजय नित्यानन्द सूरीश्वर जी महाराज के पावन आशीर्वाद
ॐ अर्हम् नम: ।
न विद्यते यद्यपि पूर्वभारती गुणानुबन्धिप्रतिभानमद्भुतम्। श्रुतेन यत्नेन च वागुपासिता, श्रुवं करोत्येव कमप्यनुग्रहम्। ।
अर्थात् यदि पूर्व पुण्योपार्जित गुणों से युक्त कौशल या प्रतिभा न हो तो भी निरन्तर उत्तम श्रवण तथा सतत प्रयत्न करने से वाग्देवी सरस्वती की कृपा होती है, इसमें कोई सन्देह नहीं है।
महिला को पुरूष से कम आंकना ठीक नहीं है। महीयसी महिलाएं सदैव समाज का आदर्श रही हैं। नर की अपेक्षा नारी शक्ति को उत्कृष्ट बताते हुए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कुछ इस प्रकार कहा है-
"एक नहीं दो दो माताएं नर से भारी नारी"
श्री आत्मवल्लभ जैन पब्लिक स्कूल, श्रीगंगानगर का न्यास पूर्णतया इस पुनीत सेवाकार्य में अनवरत अग्रणी भूमिका निभाता रहे, इस मंगल मनीषा के साथ ..
नमो जीनानाम्
विजय नित्यानन्द सूरीश्वर